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2जी घोटाला फैसला: टूजी घोटाले में न राजा दोषी न कनिमोझी

देश के सबसे चर्चित घोटाले टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में अदालत के फैसले ने सियासी माहौल गरमा दिया है। सीबीआई की विशेष अदालत ने इस मामले में पूर्व संचार मंत्री ए. राजा और द्रमुक सांसद कनिमोझी सहित सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। इस फैसले से भाजपा सकते में है और कांग्रेस हमलावर। घोटाला 1.76 लाख करोड़ रुपए का था। यूपीए सरकार को इस घोटाले ने बेतरह परेशान किया था।

मनमोहन सिंह सरकार में संचार मंत्री थे। भारतीय जनता पार्टी भ्रष्टाचार के इन आरोपों पर सवार होकर ही सत्ता में पहुंची थी। टूजी घोटाले पर भाजपा ने लगातार यूपीए सरकार और तबके प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर हल्ला बोला था। कांग्रेस अगर आज इसे सियासी प्रोपंगडा बता कर भाजपा पर हमलावार है तो इसकी वजह साफ है।

2जी घोटाला फैसला

कांग्रेस अब इस मामले पर सरकार की घेरेबंदी में जुट गई है। फैसला ऐसे वक्त आया है जब संसद का शीतकालीन सत्र चल रहा है। फैसले के फौरन बाद संसद के दोनों सदनों में इस मामले को कांग्रेस ने उठाया और यूपीए सरकार के खिलाफ दुष्प्रचार के लिए भाजपा से माफी मांगने तक की मांग कर दी। भाजपा के लिए अदालत का फैसला परेशान करने वाला रहा। हालांकि भाजपा का कहना है कि अदालत का फैसला सर्टिफिकेट नहीं है। भाजपा ने तर्क दिया कि सुप्रीम कोर्ट ने स्पेक्ट्रम लाइसेंस रद्द कर दिया था, इससे साबित होता है कि गड़बड़ हुई थी।

सीबीआई की विशेष अदालत में 1.76 लाख करोड़ रुपए के घोटाले का मामला 2010 से चल रहा था। विशेष अदालत के जज ओपी सैनी ने अपने फैसले में साफ किया कि आरोपियों के खिलाफ सीबीआई सबूत पेश नहीं कर पाई। अदालत ने साफ किया कि सीबीआई ने मामले को गलत ढंग से पेश किया है।

2जी घोटाला फैसला

फैसले के वक्त अदालत में राजा और कनिमोझी तो मौजूद थे। उनके समर्थक भी बड़ी तादाद में अदालत परिसर में मौजूद थे। राजा की पत्नी और बेटी भी अदालत परिसर में थी और फैसले के बाद दोनों रो पड़ीं। इस मामले में सीबीआई के अलावा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने भी मुकदमा दर्ज किया था। सीबीआई ने इस मामले में चार्जशीट भी दायर कर दी थी और विशेष अदालत ने 2011 में इस मामले में आरोपियों के खिलाफ आरोप भी तय किए थे।

सीबीआई और ईडी ने आरोपियों के खिलाफ कई आरोप लगाए थे। विशेष अदालत ने राजा और कनिमोझी सहित दूसरे आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ मनीलाड्रिंग रोकथाम कानून के तहत आरोप तय किए थे। इन पर आपराधिक षडयंत्र रचने, धोखाधड़ी, फर्जी दस्‍तावेज बनाने, पद का दुरुपयोग करने और रिश्वत लेने जैसे आरोप थे। सीबीआई ने टूजी घोटाला मामले में अप्रैल 2011 में आरोपपत्र दाखिल किया था। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया था कि स्‍पेक्‍ट्रम के लिए 122 लाइसेंस जारी करने में गड़बड़ी के  कारण 30,984 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने दो फरवरी, 2012 को लाइसेंस को रद्द कर दिया था।

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अदालत के इस फैसले के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर हल्ला बोला है। कांग्रेस ने सीएजी के पूर्व प्रमुख विनोद राय पर भी कांग्रेस ने हमला बोला। कांग्रेस ने राय से भी देश से माफी मांगने को कहा है। हालांकि भाजपा अब अपने बचाव में सुप्रीम कोर्ट के स्पेक्ट्र्म रद्द करने की दलील दे रहे हैं। लेकिन इस फैसले ने कांग्रेस को बहुत अरसे के बाद मुस्कराने का मौका तो दिया ही है। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी फैसला का स्वागत करते हुए कहा कि अदालत ने सब कुछ साफ कर दिया है। फैसला मेरे और मेरी सरकार पर लगाए आरोपों का जवाब है।

अदालत के फैसले ने राजा और कनिमोझी को बहुत राहत पहुंचाई है। राजा इस मामले में करीब पंद्रह महीने जेल में रहे थे। उन पर करीब दो सौ करोड़ रुपए रिश्वत लेने का आरोप लगा था। कनिमोझी को भी इस मामले में जेल जाना पड़ा था। लेकिन इस फैसले ने दोनों को बड़ी राहत दी है। कनिमोझी ने फैसले पर संतोष जताया।

2जी घोटाला फैसला

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी फैसले के बाद उन्हें बधाई दी। कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद, कपिल सिब्बल, पी. चिंदबरम सहित कई बड़े नेताओं ने फैसले के बाद भाजपा पर हमला बोला। आजाद ने तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में स्पष्टीकरण देने को कहा और भाजपा से पूरे विश्व से माफी मांगने को कहा है।

आम आदमी पार्टी ने भी केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि भाजपा  ने द्रमुक से डील कर ली है। आप का कहना है कि पिछले साढ़े तीन सालों में एजंसियां मोदी सरकार के अधीन काम कर रही है। सीबीआई ने टूजी की ठीक से जाँच क्यों नहीं की। सबूत क्यों नहीं जुटाए। भाजपा ने विपक्ष में थी तो काफी हंगामा किया था। फिर आरोपियों को सजा क्यों नहीं मिली। आप ने प्रधानमंत्री मोदी से पूछा है कि मोदी जी आप देश को बताएं कि टूजी पर आपकी सरकार से क्या डील हुआ है।

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