अकबर बीरबल कहानी कहानियां

जब बीरबल ने अकबर को पाठ पढ़ाया

एक बार, सम्राट अकबर को दुर्लभ इत्तर का उपहार मिला। जैसे ही उन्होंने इत्तर की बोतल खोली, इत्तर की एक बूंद फर्श पर गिर गई।

अकबर सहज रूप से अपनी उंगली के साथ फर्श को पोंछकर इत्तर पुनः प्राप्त करने का प्रयास करने लगे। तभी अकबर ने बीरबल के चेहरे पर एक विचित्र रूप देखा। बीरबल की आखे जैसे अकबर के इस व्यव्हार को देख कर चकित थी।

बीरबल की धारणा को बदलने के लिए, अकबर ने उसे अगली सुबह अपने स्नान गृह में बुलाया। उन्होंने अपने परिचरों से बाथटब को सर्वोत्तम इत्तर के साथ भरने के लिए कहा।

अकबर ऐसा करके बीरबल को दिखाना चाहते थे की सम्राट के रूप में वह जितना चाहें उतना इत्तर बर्बाद कर सकते है।

अकबर ने जब बीरबल से प्रतिक्रिया देने के लिए कहा तब बीरबल ने बताया की, “बूंद से जाति, वो हुध से नही आती”, जिसका मतलब यह था की जो इज़्ज़त एक बूंद से जाति है वो पूरा टब भरने से भी वापस नहीं आती।

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