अकबर बीरबल कहानी कहानियां

बीरबल की मृत्यु से जुड़ी यह घटना है सत्य

यूं तो बीरबल और अकबर की कई कहानियां हमने बहुत पढ़ी हैं। आज हम आपको एक सत्य घटना के बारे में बताने जा रहे हैं जो बीरबल की मृत्यु से जुड़ी है। बीरबल सम्राट अकबर के 9 रत्नों में सबसे खास थे।

अफगानिस्तान के यूसुफजई जनजातियों ने मुगल शासन के खिलाफ सिंधु नदी के पूर्वी तट पर विद्रोह शुरू कर दिया था। अकबर द्वारा विद्रोह को कुचलने के लिए भेजे गए सैनिक मारे जा चुके थे। अकबर ने 1586 में कमांडर जैन खान की मदद के लिए अटॉक में अपनी नई सेना सुदृढीकरण के साथ बुद्धिमान बीरबल को भेजा। बीरबल और सेना स्वात घाटी (वर्तमान में पाकिस्तान) में एक संकीर्ण दर्रे में चली गईं, अफगान सैनिक पहाड़ियों में घात लगाए बैठे थे, और उन्होंने ऊपर से गोले बरसाने शुरू कर दिए।

इसके बाद हुई अकबर की बड़ी हार में बीरबल और 8000 से ज्यादा सैनिक मारे गए। सबसे दुखद बात यह रही कि उनका शरीर कभी नहीं मिला।

यह अकबर के लिए सबसे बड़ा सैन्य नुकसान था। कहा जाता है कि अपने पसंदीदा राजदरबारी बीरबल को खोने के गम तक कुछ नहीं खाया और पिया।

वह दुखी बेहद दुखी थे क्योंकि बीरबल का शव न मिलने के कारण उनका अंतिम संस्कार भी नहीं किया जा सा था। महान अकबर ने घोषणा की थी कि सिंहासन संभालने के बाद से यह उनकी सबसे बड़ी त्रासदी थी।

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