टेक्नोलॉजी

E-mail पर जरा संभलकर, सबसे ज्यादा है साइबर अटैक का खतरा

आजकल ईमेल हमारी जरूरत का एक अहम हिस्सा बन चुक है। हाल ही की एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि ईमेल पर मालवेयर को पहचानना आसान नहीं होता है। इसलिए मेल्स पर साइबर अटैक का खतरा दोगुना होता है। हर नौ यूजर में से एक यूजर को 2017 की पहली छमाही में इस तरह के ईमेल मिले, इसका खुलासा साइबर सुरक्षा कंपनी सिमेनटेक की रिपोर्ट ‘ई-मेल थ्रेटस 2017’ में हुआ है।

बिजनेस ई-मेल समझौता (बीईसी) घोटालों को साइबर खतरे के रूप में भी पहचाना गया है। जहां स्कैमर्स किसी कंपनी के भीतर या एडमिनिस्ट्रेटिव चेन के भीतर किसी व्यक्ति का प्रतिरूप तैयार करते हैं और यूजर्स के पैसे निकालने या निजी जानकारी शेयर करने का प्रयास करते हैं।

साइबर अटैक का खतरा

ऐसे करते हैं अटैक

ऐसे इमेल में अधिकतर लुभावने ऑफर दिये जाते हैं।

ऐसे मेल्स में यूजर्स को एक फॉर्म भरने के लिए कहा जाता है, जिसमें उन्हें अपनी निजी जानकारियां देनी होती हैं। कई बार किसी प्रतिष्ठित सरकारी या निजी संस्थान का लोगो यूज किया जाता है, जिसे असली समझ कर यूजर मांगी गयी जानकारियां शेयर करने की भूल कर बैठते हैं।

ज्यादातर फर्जी इमेल्स में पंक्चुएशन मार्क्स का यूज होता है। ढेर सारे स्पेलिंग्स मिस्टेक्स या अन्य दूसरी गलतियां होती हैं।

साइबर अटैक का खतरा

 

ध्यान रखें

बैंक या अन्य सरकारी संस्थान किसी भी तरह की कानूनी या व्यवसायिक जानकारी आपको डाक से भेजते हैं या फिर इसके लिए आपको उनके निजी साइट्स पर जाना पड़ता है। ऐसा हो तो तुरंत उन संस्थान को सूचित करें।

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