महाभारत

भीष्मपितामह ने जब भोजन करते हुए कौरवों और पांडवो की परीक्षा ली

Written by Prajapati

जब कौरवों और पांडव युवा थे तब भीष्मपितामह ने उनके लिए एक भोज आयोजित किया था। वहां सभी पांडव और कौरव बंधु मौजूद थे।

भीष्मपितामह ने पांडव और कौरव बंधु को बताया की आज खाने के लिए एक सरल नियम है, कोई भी अपने हाथ की कोहनी को मोड़े बिना खाना खायेगा अब आप सब शुरू कर सकते हैं।

भीष्मपितामह

सभी पांडव और कौरव बंधु अचरज में एक-दूसरे को देखते हैं। वे अपना हाथ मोड़े बिना अपने मुंह से भोजन पाने के लिए अलग-अलग तरीकों की कोशिश करना शुरू कर देते हैं लेकिन प्रयास व्यर्थ थे। विदुर और भीष्म उनके सामने इस दृश्य पर हंसते हुए दिखते हैं।

युधिष्ठिर एकमात्र ऐसा था जो कुछ भी करने की कोशिश नहीं करता है और अचानक उसे एक विचार आता है।

वह अपनी प्लेट से भोजन का एक टुकड़ा लेता है और उसे दुर्योधन के मुंह के सामने रखता है। दुर्योधन अचंबित से युधिष्ठिर की तरफ देखते है और युधिष्ठिर मुस्कुराकर कहते है की हम एक-दूसरे को भोजन करवा सकते है तो अपनी कोहनी मोड़ने की कोई जरुरत नहीं है

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