महाभारत

महाभारत में गांधारी ने 100 कौरवों को कैसे जन्म दिया?

महाभारत के बारे में हम बचपन से सुनते आए है। महाकाव्य जो महाभारत से प्रसिद्ध है। यह सबसे बड़ा साहित्य ग्रन्थ है। महाभारत को एक धार्मिक, पौराणिक, ऐतिहासिक और दार्शनिक ग्रंथ कहा जाता है। इस इतिहास में कुछ ऐसी भी बहोत सी ऐसी बाते है जो हमको सोच ने पे मजबूर कर देती है।

आज हम ऐसी एक बात के बारे मैं बताने जा रहे है। राजा धृतराष्ट्र और गांधारी के १०० पुत्रो को हम कौरवो के नाम से जानते है। तो आज हम जानेगे की गांधारी ने एक साथ कैसे १०० कौरवो को जन्म दिया। तो आइए जानते है…

एक बार महर्षि वेद व्यास हस्तिनापुर आए थे। तब गांधारी ने बड़ी श्रद्धा के साथ उनकी सेवा की थी। गांधारी के द्वारा की गई सेवा से प्रसन्न होकर महर्षि ने गांधारी को १०० पुत्रो का वरदान दिया।

]समय अनुसार गांधारी गर्भवती हुई। गर्भ दो साल तक रहने पर वो गभरा गई और उसने अपना गर्भ गिरा ने पर उसके गर्भ मैं से लोहे जैसा मांस पिंड बहार निकला। ये सब महर्षि वेद व्यास ने अपनी दिव्य दृष्टि से देखा और वो तुरंत हस्तिनापुर गांधारी के पास आ गए।

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गांधारी के पास आने के बाद महर्षि वेद व्यास ने गांधारी को उस मांस पिंड पर पानी छिड़क ने को कहा। पानी छिड़क ने के तुरंत बाद वो मांस पिंड के १०१ टुकड़े हो गए। तब महर्षि ने उन टुकड़ो को घी से भरे कुंड मैं रखने को कहा और उसको दो साल के बाद खोलने को कहा। दो साल का समय बीतने पर घी के कुंड मई से पहले दुर्योधन और उसके बाद गांधारी के ९९ बेटे और १ बेटी हुई।

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