रामायण

जानिए हनुमान जी आखिर भगवान कृष्ण के सच्चे भक्त क्यों नहीं बने

दरअसल श्री राम, श्री कृष्ण और श्री विष्णु एक ही व्यक्तित्व हैं लेकिन तीन अलग-अलग शाश्वत रूपों में। वैदिक ग्रंथों में प्रभु को “आदी अनन्त रुपम” कहा गया है, जिसका अर्थ है कि भगवान के पास बहुत से अनन्त रूप हैं।

श्रीमान भागवतम कहते हैं की हे ब्राह्मण, भगवान के अवतार अनगिनत हैं, जैसे पानी के अतुलनीय स्रोत से बहनेवाले नदीएं।

लेकिन अगर आप कृष्ण के बारे में पूछ रहे हैं तो, हाँ ! हनुमानजी भगवान कृष्ण के भक्त हैं। वह द्वारिका में भगवान कृष्ण से मिलते हैं और अपने राम को दिखाने का अनुरोध करते हैं। अपने भगवान श्रीकृष्ण के आदेश के अनुसार, हनुमान झंडा के रूप में अर्जुन के रथ पर बने रहे।

हनुमान जी

श्री हनुमानजी कृष्ण को श्री राम के रूप में स्वयं स्वीकार करते थे और भक्ति और प्रेम के साथ अपने आदेशों का पालन करते थे।

लेकिन यह समझा जाना चाहिए कि श्री हनुमानजी श्री राम के देवदेव के रूप से अधिक जुड़े हुए हैं। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि (श्री हनुमानजी के अनुसार) श्री राम एक अन्य व्यक्तित्व है यह भगवान राम के रूप में श्री राम के प्रति अपनी दास भक्ति है।

जो प्रेम और स्नेह हनुमान जी प्रभु श्री राम के लिए महसूस करते है वो प्रेम और स्नेह किसी के लिए भी लाना थोड़ा मुश्किल जरुरु है।

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