जीवन मंत्र महाभारत

श्रीमद् भागवत गीता में भगवान कृष्ण ने बताए निर्णय लेने के ये तरीके

5000 साल पहले भगवान कृष्ण ने श्रीमद् भागवत गीता में निर्णय लेने के यह तरीके बताए हैं जो आपको निर्णय लेने में मदद कर सकते हैं।

कृष्ण के अनुसार हमें अपनी भावनाओं के अनुसार निर्णय नहीं लेना चाहिए, बल्कि वो निर्णय लेना चाहिए जो आपके लिए सही है। क्योंकि फीलिंग्स तो क्षणिक होती हैं, जिस तरह से अर्जुन को अपने रिश्तेदारों के खिलाफ युद्ध नहीं लड़ने का मन था लेकिन उनके लिए वह जरूरी थी, तब कृष्ण ने यह बात उन्हें समझायी। इसी तरह उदाहरण के लिए एक बच्चे को टीवी देखना अच्छा लगता है लेकिन पढ़ना नहीं, ऐसे में उसके लिए सही निर्णय उसकी भावनाओं में बहकर नहीं लिया जा सकता।

  • श्रीमद् भागवतगीता के छठे अध्याय में भगवान कृष्ण ने बताया कि बहुत ज्यादा खुश या बहुत ज्यादा दुखी होने की स्थिति में निर्णय नहीं लेना चाहिए।
  • क्रोध या मोह का आधार बनाकर भी निर्णय नहीं लिया जाना चाहिए।
  • भगवतगीता के अनुसार आप कर्म कीजिए लेकिन फल की चिंता मत करो। इसका मतलब है कि सिर्फ रिजल्ट को ध्यान में रखकर ही निर्णय नहीं लेना चाहिए। भले ही आपको अच्छे रिजल्ट न मिले लेकिन आपको अच्छे काम करना नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि फल आपके हाथ में नहीं है।
  • अगर आपके निर्णय लेने से बदलाव आ रहा हो तो आपको घबराना नहीं चाहिए। अर्जुन पहली बार युद्ध लड़ रहे हैं और इससे बदलाव आना है लेकिन वह इसके लिए तैयार नहीं हैं। अर्जुन के मन में यह डर है कि वह युद्ध लड़कर अपनों को खो देंगे, भगवान कृष्ण उन्हें इस डर से बाहर निकालते हैं।
  • हम जो भी बिना विश्वास के करते हैं वह बेकार है, इसलिए हमेशा विश्वास करने के बाद ही कोई निर्णय लें, तभी आप उस पर कायम रह पाएंगे।
  • अपनी सोच और उद्देश्य बढ़ा रख कर ही निर्णय लें।

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