अजब गजब इतिहास

ये है इजिप्ट का डरावना और रहस्यमय हिंदू मंदिर महल, जानिए पूरी कहानी

गीज़ा के पिरामिड से मिस्र के देवताओं और देवियों तक, यह जगह निश्चित रूप से आश्चर्य की भूमि रही है। मिस्र में इस तरह के रहस्यमय स्थानों में से एक काहिरा में भूतहा हिंदू मंदिर-पैलेस भी है। जैसा ही आप काहिरा पार करते हैं, हेलीओपोलिस के उपनगर में ‘ले पालिस हिंदु’ के भव्य भारतीय वास्तुकला से आश्चर्यचकित हो जाएं, इसे ज्यादातर स्थानीय नाम से जाना जाता है; ‘कसर-ए-बैरन’ या ‘बैरन महल’। यह जगह रहस्यमय घटनाओं के लिए कुख्यात है। 1950 से महल में कोई नहीं रहता।

काहिरा में यह वास्तुशिल्प की विरासत बेल्जियम के करोड़पति उद्योगपति और मिस्र के विशेषज्ञ, बैरन एडौर्ड एम्पेन के स्वामित्व में थी। बैरन अपने लिए और भी धन बनाने के प्रयास में मिस्र आए थे। वह भारतीय वास्तुकला से काफी प्रभावित थे।

1907 में, उन्होंने प्रसिद्ध फ्रांसीसी वास्तुकार अलेक्जेंड्रे मार्सेल को सर्वश्रेष्ठ हिंदू मंदिरों की प्रतिलिपि बनाने के लिए नियुक्त किया। मार्सेल ने अंगकोरवाट के प्रसिद्ध मंदिर और ओडिशा के कई खूबसूरत मंदिरों से अपनी प्रेरणा ली।

1907-1911 के बीच बनकर तैयार हुआ। दो मंजिलों पर फैला हुआ महल, इसमें ग्रैंड सीढ़ियां, रहने वाले कमरे, एक पुस्तकालय और बेडरूम स्वीट शामिल थे। पूरा महल हिन्दू-पौराणिक कथाओं के दृश्यों से भरा था। इसे इस तरह से बनाया गया था, कि यह कमरे में सीधे सूर्य की रोशनी सुनिश्चित करने के लिए 360 डिग्री घुमाया जा सकता था।

एक बार घूमने वाले इस टॉवर से बैरन की बहन नीचे गिर गईं और संदिग्ध परिस्थितियों में उनकी मौत हो गई। बैरन की बेटी की दिमागी रूप से बीमारी की हालत में मृत पाईं गईं। 1929 में बैरन की मृत्यु भी होगी। इसके बाद भी उनका परिवार यहां रहा और 1952 में लंदन चला गया। 1957 में पैलेस सऊदी इन्वेस्टर को बेच दिया गया। 1990 में वहां अजीब घटनाएं घटने लगीं। वहां के लोगों ने महल के फर्श और शीशों पर खून देखा है। उसके बाद से महल पूरी तरह से सूनसान हो गया।

2017 में इस महल को दोबारा ठीक करने का काम वहां की सरकार कर रही है, ताकि इसे होटल और कसीनो में कन्वर्ट किया जा सके।

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