लाइफस्टाइल

खेलना हैं बच्चों के जीवन के लिए लाभकारी

हम में से बहुत लोग सोचते हैं कि बच्चों के खेलने को केवल एक शारीरिक व्यायाम के रूप में लेते हैं, लेकिन खेलों से मस्तिष्क के विकास में भी सहायता मिलती है। खेलते समय या व्यायाम करते समय शरीर से एक रसायन जिसे एनडोरफिन कहते हैं वह निसृत होता है। इसे खुशियों वाला रसायन भी कहते हैं। जो बच्चे खेलते हैं वह इस हार्मोंस के निसृत होने के कारण खुश रहते हैं। खुशियां कहीं बाहर से नहीं आती बल्कि यह हमारे अंदर से ही आती हैं।

इस मामले में खुशियों वाला हार्मोंस बहुत ही लाभकारी है। जो बच्चे नियमित रूप से खेलते हैं वह बहुत क्रियाशील रहते हैं। सामान्यत: इन बच्चों में आत्महत्या की प्रवृत्ति, चरित्र विकार, बुरी आदते बहुत कम होती हैं। जीवन अवधि बढ़ जाती है जो बच्चे खेल-कूद में क्रियाशील होते हैं उनकी जीवन अवधि लम्बी होती है। इन बच्चों में मनोवैज्ञानिक तंत्रिका-अंतःस्रावी प्रणाली स्थिर और व्यवस्थित रहती है। इससे शरीर की प्रतिरोध क्षमता बढ़ती है। इससे एलर्जी, संक्रमण और ऑटो प्रतिरक्षा रोग दूर रहते हैं। हाल में हुए अध्ययनों की मानें तो इससे संविदाकारी कैंसर की आशंका भी कम होती है।

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