रामायण

जब श्रवण कुमार ने राजा दशरथ को शाप दिया

रामायण में उप कथाओं में श्रवण कुमार के बारे में बताया गया है। एक सक्षम शरीरधारी युवा, जो अपने अंधे माता-पिता को अपने साथ रखता है और उनकी अच्छे से देखभाल करता है।

एक बार जब श्रवण कुमार पानी से पिचर भर रहा था तभी उसकी पानी भरने की आवाज़ को राजा दशरथ ने जानवर की आवाज समझ लिया। राजा दशरथ को लगा की कोई शिकार पानी पिने आया है और उन्होंने उसी दिशा में एक तीर चला दिया।

राजा दशरथ का चलाया हुआ तीर सीधा श्रवण कुमार को लगता है जब राजा दशरथ को अपनी गलती का पता चलता है तब उन्हें बहोत दुःख होता है और भयभीत होते है।

श्रवण कुमार मरते वक़त राजा दशरथ को अपने अंधे माता-पिता को पानी देने के लिए कहते है। जब दशरथ श्रवण कुमार के माता-पिता को बताते हैं कि क्या हुआ था, तो उन्होंने उन्हें यह कहते हुए शाप दिया था कि जैसे ही हम अपने बेटे से अलग होने के शोक में मर जाएंगे, वैसे ही तुम्हारे साथ होगा। राजा दशरथ के साथ भी ऐसा ही हुआ।

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