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गुजरात में जल संकट बहोत बड़ा खतरा, पानी ख़तम हो रहा है

राज्य के बांधों में पानी घटते-घटते महज 33.89 प्रतिशत रह गया है। अधिकांश जलाशयों सूख गये है। 204 बांधों में से गुजरात के 174 बांधों ऐसे हैं जिनमे पानी 25 प्रतिशत से भी कम है। बांध की असमान स्थिति को देखते हुए, गुजरात में मानसून का मौसम शुरू होने से पहले, पानी की किल्लत का खतरा बन गया है।

गर्मी की ऋतु में अभी अप्रैल ही चल रहा है और जुलाई-अगस्त आते-आते पानी को लेकर हाहाकार मच सकता है। जल संसाधन विभाग के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार , कुछ इलाकों में अभी से पानी की किल्लत है। बांध के पानी के मुद्दे में सबसे खराब स्थिति सौराष्ट्र है। गर्मी की शुरुआत के साथ, गुजरात में पीने के पानी की किल्लत शुरू हो गयी है। गुजरात में पानी की कमी बढ़ती ही जा रही है।

राज्य के कुल 204 बांधों में केवल 33.89 प्रतिशत पानी बचा है। नर्मदा बांध जिसको गुजरात के लोंगो की जीवन रेखा कहा जाता है उसमें भी कुल भंडारण क्षमता का 50.86 प्रतिशत पानी है। सौराष्ट्र के 138 जलाशयों में सिर्फ 10.72 प्रतिशत पानी बचा है, वहीं कच्छ के 20 बांधों में 13.12 प्रतिशत पानी बचा है।

उत्तर गुजरात के 15 बांधो की हालत भी नाजुक है। उत्तर गुजरात के कुल 15 बांधो में 16.45 प्रतिशत पानी का भंडारण है, दक्षिण गुजरात में 13 बांघो में 23.19 प्रतिशत औऱ मध्य गुजरात के 17 बांधो में 46.22 प्रतिशत पानी बचा है। पानी कम होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में अभी से संकट का सामना करना पड रहा है।

सूरत में तापी नदी में पानी है, लेकिन बाकी नदियों में पानी बहुत कम है। सौराष्ट्र में जो बांध है उसमें पानी नहीं होने के कारण पीने के पानी का संकट मंडरा रहा है। कच्छ में गांवों की हालत बहुत खराब हो चुकी है।

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