महाभारत

जब भीष्मपितामह की गलती पांडवो के लिए आशीर्वाद बनी

भीष्म ने महाभारत युद्ध में पांडवों को मारने की शपथ ली थी। चिंतित द्रौपदी को देखते हुए कृष्ण ने द्रोपदी को भीष्म के पास जाने के लिए और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए कहा। यह विचार था कि भीष्म को नहीं पता था कि मिलने कौन आया था और यदि कोई अपने पैरों को छूता है तो वह कहेंगे धीरा सुमंगाली भव।

द्रौपदी भीष्म को मिलने के लिए गयी उस दिन बहोत जोरसे बारिश हो रही थी। द्रौपदी ने चप्पल पहने हुए थे कृष्णा ने द्रोपदी को चप्पल बहार रखने के लिए कहा क्युकी भीष्म को पता नहीं चलना चाहिए के उनसे मिलने कौन आया है।

द्रौपदी अंदर जा कर भीष्म के पैर को छूते हैं और भीष्म को पता नहीं चलता के द्रोपदी आयी है वह उसको सुहागन का आशीर्वाद देते है बाद में भीष्म को अपनी गलती समझ में आती है।

इसके बाद वह द्रोपदी को बताते है कि यह कृष्ण का जाल हो सकता था और यह देखने के लिए कि क्या कृष्णा वहाँ है, अपने कमरे से बाहर निकलते हैं। वर्षा में, भगवान कृष्ण को अपने हाथ में द्रौपदी की चप्पल पकड़े हुए देखते है।

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