इतिहास

पति के नाम से छापी जाती थीं होमी व्यारवाला की ली गईं तस्वीरें

भारत की पहली महिला फोटो जर्नलिस्ट होमी व्यारवाला का जन्म गुजरात में 9 दिसंबर 1913 को एक पारसी परिवार में हुआ। लॉर्ड माउंटबेटन से लेकर इंदिरा गांधी उन्होंने लगभग देश के हर ऐतिहासिक क्षण को अपने कैमरे में कैद किया। उन्होंने उस समय कैमरा उठाया जब यह लोगों के लिए अजूबा हुआ करता था। पत्रकारिता में आज भी महिला फोटोजर्नलिस्ट की संख्या बेहद कम है। होमी व्यारवाला को इसके लिए 2011 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। 2012 में होमी व्यारवाला का निधन हो गया और उस समय वह 98 वर्ष की थी।

होमी व्यारवाला

आइए जानें कुछ दिलचस्प तथ्य 

  • होमी व्यारवाला को उनके एक दोस्त ने फोटोग्राफी सिखाई थी।
  • उस दौरी में होमी ने पत्रकारिता का करियर चूज करके सबको अचंभित कर दिया।
  • मुंबई में पली-बढ़ीं होमी ने फोटोग्राफी की शिक्षा जेजे स्कूल ऑफ आर्ट से ली।
  • होमी ने अपने हाथों में रॉलिफ्लेक्स कैमरा के साथ अपने पेशे को 1930 से 1970 तक बखूबी निभाया।
  • होमी व्यारवाला फोटोग्राफी में ‘ब्लैक एंड व्हॉइट’ तस्वीरें लेना ज्यादा पसंद करती थीं।
  • उन्हें उस समय अपनी हर फोटो के लिए 1 रुपये मिलते थे।

होमी व्यारवाला

  • काफी समय तक उनके द्वारा ली गईं तस्वीरें उनके पति के नाम से छापी जाती थीं।
  • होमी के मुताबिक नेहरू सबसे ज्यादा फोटोजेनिक व्यक्ति थी। उनकी सबसे बेहतरीन फोटो में से नेहरू जी की फोटो हैं।
  • होमी व्यारावाला ने अगस्त 1947 को लाल किले पर पहली बार फहराये गये झंडे, भारत से लॉर्ड माऊन्टबेन्टन के डिपार्चर, महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू तथा लाल बहादुर शास्त्री की अंतिम यात्रा की भी तस्वीरें भी अपने कैमरे में कैद कीं।
  • 1970 में होमी ने अपने पति के निधन के बाद फोटोग्राफी छोड़ दी। हालांकि उन्होंने इस पेशे को 40 साल तक जारी रखा।

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