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तेनाली रामा और लालची ब्राह्मणो की मजेदार कहानी

तेनाली रामा और लालची ब्राह्मणो की मजेदार कहानी की आज हम बात करेंगे। एक दिन की बात है जब राजा कृष्णदेवराय को अपनी माताजी की आखरी इच्छा याद आयी। उनकी माताजी को रत्नागिरी के आम खाने इच्छा हुई। तो राजा ने अपनी माताजी की इच्छा पूरी करने के लिए रत्नागिरी से बहोत सारे आम की पेटियां मंगवाई, लेकिन जिस दिन आम आने वाले थे उसे पहले ही राजा कृष्णदेवराय की माता का देहांत हो गया और उनकी आम खाने की इच्छा अधूरी रह गयी।

राजा कृष्णदेवराय ने अपनी माताजी की आखरी इच्छा जो अधूरी रह गयी है उसके बारे में राज दरबार में बताई। और उन्होंने राज दरबार में ब्राह्मण को उन से कहा की आप ही बताइए के राजमाता की रत्नागिरी के आम खाने की इच्छा अधूरी रह गयी है तो कैसे पूरा करे। ब्राह्मण काफी लालची थे। ब्राह्मण ने राजा से कहा की राजमाता उनके सपने में आई थी और उन्होंने कहा है की सभी ब्राह्मणो को एक एक सोने का आम दिया जाये तभी उनकी आखरी इच्छा पूरी होगी। ब्राह्मण की यह बात सुनकर राजा कृष्णदेवराय ने सभी ब्राह्मणो को एक एक सोने का आम दिया।

तेनाली रामाने यह सब देखा की कैसे लालची ब्राह्मण ने राजमाता की आखरी इच्छा के नाम पर सोने के आम ले लिए। तभी रामाने लालची ब्राह्मण को सबक सिखाने की एक योजना बनाई। उसने भी अपने पिताजी की आत्मा की शांति के लिए उसी लालची ब्राह्मणो को अपने घर आने के लिए आमंत्रित किया और उनको अच्छे से खिलाया पिलाया। तेनाली रामाने घर के सारे खिड़की दरवाजे बंध कर दिए और चाबुक लेकर उन ब्राह्मणो के पास आये।

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ब्राह्मणो ने पूछा रामा चाबुक क्यों लाये हो। तभी रामाने कहा की मेरे पिताजी की आखरी इच्छा थी की में उनको 100 कोड़े मारु। पर में उनका बेटा था और बेटा कैसे अपने पिताजी को मर सकता है। उनकी यह इच्छा अधूरी रह गयी। इसीलिए में आपको 100 कोड़े मारूंगा। ये सुन कर सारे लालची ब्राह्मण डर गए और कहा की रामा तुम ये गलत कर रहे हो। तुम ब्राह्मणो का अपमान कर रहो हो। ब्राह्मणो ने राजा कृष्णदेवराय को रामा के खिलाफ शिकायत की।

तभी तेनाली रामा ने अपनी सफाई में कहा की जिस तरह आपने सोने का आम लेकर राजमाता की अंतिम इच्छा पूरी की उसी तरह में अपने पिताजी की आखरी इच्छा पूरी करना चाहता हूँ तो में कैसे गलत हुआ। यह सुनकर ब्राह्मणो को अपनी गलती समज आयी और उन्होंने राजा कृष्णदेवराय और तेनाली रामा से माफ़ी मांगी और सोने के आम भी वापस कर दिए।

तेनाली रामा ने अपनी चतुराई से इस तरह लालची ब्राह्मणो से राजकोष के धन को बचाया।

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